1.
Paheliyan
वन में करता शोर-पहेली
रंग बिरंगा बदन है इसका, कुदरत का वरदान मिला, इतनी सुंदरता पाकर भी, दो अक्षर का नाम मिला, ये वन में करता शोर, इसके चर्चे हैं हर ओर।
उत्तर – मोर
रंग बिरंगा बदन है इसका, कुदरत का वरदान मिला, इतनी सुंदरता पाकर भी, दो अक्षर का नाम मिला, ये वन में करता शोर, इसके चर्चे हैं हर ओर।
उत्तर – मोर
एक राजा की गजब है रानी, दुम के रास्ते वो पीती है पानी! बताओ कौन?
उत्तर- दीपक
मेरे नाम के दो मतलब हैं, दोनों के हैं अर्थ निराले, एक अर्थ में सब्जी हूं मैं, एक अर्थ में पालने वाले।
उत्तर - पालक
सरस्वती की सफेद सवारी, मोती जिसको भाते, करके अलग दूध से पानी, बोलो कौन कहलाते?
उत्तर - हंस
अंत कटे तो जमा जोड हूं, मध्य कटे तो जना, आदि कटे तो सबने माना, कैसे हाय आ गया जमाना ?
उत्तर – ज़माना
घर में उछल कूद करता, नीली आंखों से मैं डरता, घर में जो कुछ मिल जाता, कुतर कुतर उसको खा जाता।
उत्तर - चूहा
तीन अक्षरों का मेरा नाम, प्रथम कटे तो चार, कैसे हो तुम मैं जानू, बोलो तुम सोच विचार।
उत्तर - अचार
प्रथम कटे पूजा में लीन, मध्य कटे तो कान, अंत कटे तो काली देखा, अक्षर हैं केवल तीन।
उत्तर- कालीन
सिर छोटा और पेट बड़ा, तीन टांग पर रहे खड़ा, खाता हवा और पीता तेल, और दिखलाता अपना खेल?
उत्तर-स्टोव
पानी का मटका पेड़ पर लटका। हवा हो या झटका, उसको नहीं पटका।
उत्तर-नारियल
उग जाऊं मैं धरा पर, बिन डाले कोई बीज, पशु दूध दे मुझे खाए के, बोलो मैं कौन हूं?
उत्तर-घास
मैं हूं फांसी का फंदा, मुझसे लगती फांसी नहीं, मगर तुम भी कहलाओगे "साहब", मुझे गले में कसो अगर।
उत्तर- टाई
अपनी देह पर सूत लपेटे, उस बंदे को नाचत देखा, पांव अजूबा है लोहे का, बदन पर रहती पांच-छह रेखा।
उत्तर- लट्टू