16.
Paheliyan
रोशनी मुझे बनाती है, पर अंधेरा मुझे मारता है, मैं कौन हूं?
उत्तर - परछाई
घर के ऊपर में रहता, धूप से तुझे बचाता, बारिश में मैं खुद भीगता, आंच न तुझ पर आने देता।
उत्तर - छत
मध्य कटे आदमी बनती, प्रथम कटे प्रत्येक, मैं तो सब को पानी पिलाती, करती काम हूं नेक।
उत्तर- नहर
डब्बे पर डब्बा, डब्बे का गाँव, चलती फिरती बस्ती है, लोहे के पाँव |
उत्तर – रेलगाड़ी
जैसे को तैसा बताए, नहीं तनिक भी वह छिपाए, यदि गिर जाए जमीन पर, चूर चूर हो जाए।
उत्तर - दर्पण
जैसे हो तुम देखोगे वैसे, मेरे भीतर झांको, झट से दे दो जवाब इसका, खुद को कम न आंको।
उत्तर - आईना
मेरे नाम के दो मतलब हैं, दोनों के हैं अर्थ निराले, एक अर्थ में सब्जी हूं मैं, एक अर्थ में पालने वाले।
उत्तर - पालक
एक बार आता जीवन में, नहीं दोबारा आता, जो मुझको पहचान न पाता, आजीवन पछताता।
उत्तर – अवसर
सिर छोटा और पेट बड़ा, तीन टांग पर रहे खड़ा, खाता हवा और पीता तेल, और दिखलाता अपना खेल?
उत्तर-स्टोव