76.
Paheliyan
अंत कटे तो जमा - पहेली
अंत कटे तो जमा जोड हूं, मध्य कटे तो जना, आदि कटे तो सबने माना, कैसे हाय आ गया जमाना ?
उत्तर – ज़माना
अंत कटे तो जमा जोड हूं, मध्य कटे तो जना, आदि कटे तो सबने माना, कैसे हाय आ गया जमाना ?
उत्तर – ज़माना
मध्य हटा तो गधा हूं मैं, प्रथम हटा दो बर, तीन अक्षर का नाम है, पर डोलूं दुनिया भर।
उत्तर- खबर
जन्म दिया रात ने, सुबह ने किया जवान । दिन ढलते ही, निकल गई इसकी जान ॥
उत्तर-समाचार-पत्र
उग जाऊं मैं धरा पर, बिन डाले कोई बीज, पशु दूध दे मुझे खाए के, बोलो मैं कौन हूं?
उत्तर-घास
रोज शाम को आती हूं मैं, रोज सवेरे जाती हूं, नींद न मुझको कभी समझना, यद्यपि आपको सुलाती हूं।
उत्तर - रात
बीन लेकर चलता हूं, पर नहीं मैं सपेरा, दूर दूर की चीज दिखाऊं, नाम बताओ मेरा?
उत्तर – दूरबीन
तीन अक्षर का मेरा नाम, खाने के आता हूँ काम, मध्य कटे हवा हो जाता, अंत कटे तो हल कहलाता। बताओ बताओ मैं कौन हूँ?
उत्तर - हलवा
ऊपर से कुछ हरा पीला, अंदर से है भरा भरा, छिलका दूर हटा लो जी, बीज नहीं है खा लो जी।
उत्तर – केला
मेरे पास शहर हैं,लेकिन घर नहीं। मेरे पास जंगल हैं,लेकिन पेड़ नहीं। मेरे पास पानी है, लेकिन मछलियाँ नहीं। मैं क्या हूँ?
उत्तर: नक्शा
मुझे रात में जागना और दिन में सोना पसंद है। मैं क्या हूँ?
उत्तर: उल्लू
खाना कभी नहीं खाता वह, और न पीता पानी, उसकी बुद्धि के आगे तो, हार माने ज्ञानी।
उत्तर – कंप्यूटर
ठेंगा सब दिखलाएं मुझको, फिऱ भी नहीं गुस्साता हूं, कई लोगों के जेब में रहता, दोस्ती रिश्तों को बढ़ाता हूं।
उत्तर- मोबाइल