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Paheliyan
अंत कटे तो कल - पहेली
मध्य कटे तो बनता कम, अंत कटे तो कल | लेखन में आती काम, सोचो तो क्या मेरा नाम |
उत्तर – कलम
मध्य कटे तो बनता कम, अंत कटे तो कल | लेखन में आती काम, सोचो तो क्या मेरा नाम |
उत्तर – कलम
देने से घटती नहीं, करिए जी भर दान, छीने से छिनती नहीं, देते बढता मान ।
उत्तर –विद्या
सदा ही मैं चलती रहती, फिर भी कभी नहीं मैं थकती, जिसने मुझसे किया मुकाबला, उसका ही कर दिया तबादला, बताओ तो मैं हूं कौन ?
उत्तर – घडी
टोपी है हरी मेरी, लाल है दुशाला | पेट में अजीब लगी, दानों की माला |
उत्तर – मिर्च
मैं हूं फांसी का फंदा, मुझसे लगती फांसी नहीं, मगर तुम भी कहलाओगे "साहब", मुझे गले में कसो अगर।
उत्तर- टाई
एक नारी के बारह बेटे, पोते हैं कुल साठ, हर पोते के साठ है बेटे, नारी बिल्कुल काठ।
उत्तर - टेप
चार खानों का एक मैदान, बच्चे बूढ़े सब का रुझान, विश्व को भारत का यह दान, कहे गोपू भी सीना तान।
उत्तर- शतरंज
एक इंसान का अचरज भेद, हाड़ हाड़ में बांके छेद, मोहि अचंभा आवे ऐसे, जीव बसे है वामे कैसे।
उत्तर - पिंजरा
प्रथम कटे दूल्हा बन जाऊं, चूल्हा जलाने के काम आऊं, उत्सव में मैं पोता जाऊं, पास पशु के पाया जाऊं।
उत्तर – गोबर
सबके हीं घर ये जाए, तीन अक्षर का नाम बताए | शुरु के दो अति हो जाए, अंतिम दो से तिथि बन जाए |
उत्तर – अतिथि
छोटा-सा दाना हूँ, दिखने में चमकीला, मुझको अगर भूनोगे, तो फूल मिलेगा पीला.
उत्तर : मक्का