106.
Paheliyan
चीज़ जो चलते-चलते थक जाए - पहेली
ऐसी कौन सी चीज़ है जो चलते-चलते थक जाए, तो उसकी गर्दन काटने पर वापस चलने लग जाती है?
उत्तर –पेंसिल
ऐसी कौन सी चीज़ है जो चलते-चलते थक जाए, तो उसकी गर्दन काटने पर वापस चलने लग जाती है?
उत्तर –पेंसिल
करती नहीं यात्रा दो गज़, फिर भी दिन भर चलती है। रसवंती है नाज़ुक भी है, और गुफा में रहती है ?
उत्तर – ज़ुबान (जीभ)
वह कौन है जिसके पास कभी तो दर्जनों कपड़े होते हैं और कभी एक भी नहीं होता ?
उत्तर – वॉशिंग मशीन
चढ़ा दूँ मेरे सिर पर या पैरों पर आओगे ज़रा आराम से पगले ना संभले तो कमर सहलाओगे ?
उत्तर – सीढ़ी
"सिर पर मेरे टोपी लाल, कागज पर मैं करूँ कमाल। लिखते-लिखते घटती जाऊँ, अंत समय में काम न आऊँ।"
पेंसिल
"काले रंग का मेरा चोला, धूप देख मैं जगती हूँ, छांव मिले या रात घनेरी, पल में गायब होती हूँ।" "हाथ कभी न आऊँ तेरे, संग-संग तेरे चलती हूँ।"
परछाईं