16.
Paheliyan
जितना निकालो, उतना ही बढ़ता हूँ, सब मुझसे डरते हैं, पर मैं कुछ नहीं करता। मैं क्या हूँ?
उत्तर: अंधेरा
वह कौन-सी चीज़ है जिसका रंग काला है, वह उजाले में तो नजर आती है, परन्तु अंधरे में दिखाई नहीं पड़ती। बोलो क्या है वो?
उत्तर – परछाई।
ऐसी क्या चीज है,जो जून में होती है दिसंबर में नहीं, आग में होती है लेकिन पानी में नहीं।
उत्तर – गर्मी।
जन्म दिया रात ने, सुबह ने किया जवान । दिन ढलते ही, निकल गई इसकी जान।
उत्तर – समाचार-पत्र।
उछले दौड़े कूदे दिनभर, यह दिखने में बड़ा ही सुंदर, लेकिन नहीं ये भालू बंदर। अपनी धुन में मस्त कलंदर, इसके नाम में जुड़ा है रन, घर हैं इसके सुंदर वन, बताओ कौन ॥
उत्तर – हिरन।
सुंदर-सुंदर ख़्वाब दिखाती, पास सभी के रात में आती, थके मान्दे को दे आराम, जल्द बताओ उसका नाम?
उत्तर – नींद।
जो करता है वायु शुद्ध, फल देकर जो पेट भरे। मानव बना है उसका दुश्मन, फिर भी वह उपकार करे।
उत्तर – पेड़।
चार कोनों का नगर बना, चार कुँए बिन पानी, चोर 18 उसमे बैठे लिए एक रानी । आया एक दरोगा, सब को पीट-पीट कर कुँए में डाला, बताओ क्या ॥
उत्तर – कैरम बोर्ड।
मेरे पास आओ तो ज्ञान दूँ, मुझे जितना दूसरों को बाँटो, उतना ही मैं बढ़ता जाऊँ। बताओ मैं क्या हूँ?
ज्ञान
कांटेदार खाल के भीतर एक रसगुल्ला, सभी प्रेम से खाते उसको, क्या पंडित क्या मुल्ला।
उत्तर – लीची।