31.
Paheliyan
चार कोनों का नगर-पहेली
चार कोनों का नगर बना, चार कुँए बिन पानी, चोर 18 उसमे बैठे लिए एक रानी । आया एक दरोगा, सब को पीट-पीट कर कुँए में डाला, बताओ क्या ॥
उत्तर – कैरम बोर्ड।
चार कोनों का नगर बना, चार कुँए बिन पानी, चोर 18 उसमे बैठे लिए एक रानी । आया एक दरोगा, सब को पीट-पीट कर कुँए में डाला, बताओ क्या ॥
उत्तर – कैरम बोर्ड।
काला रंग मेरी है शान, सबको मैं देता हूँ ज्ञान । शिक्षक करते मुझ पर काम, नाम बताकर बनो महान ॥
उत्तर – ब्लैक-बोर्ड।
मैं किसी चीज़ को छूता नहीं, फिर भी उसे हिला सकता हूँ। मुझे देखा नहीं जा सकता, लेकिन मेरे आने का एहसास होता है। पेड़ मेरे आते ही झूमने लगते हैं। बताओ मैं कौन हूँ?
हवा।
जल से भरा एक मटका, जो है सबसे ऊँचा लटका। पी लो पानी है मीठा, ज़रा नहीं है खट्टा।
उत्तर – नारियल।
ऐसी क्या चीज है जो आंखों के सामने आने से आंखें बंद हो जाती है।
उत्तर – रौशनी।
मेरा सिर है, पर आँख नहीं, पेट है, पर खाना नहीं। पैर हैं, पर चल नहीं सकता। मैं क्या हूँ?
उत्तर: मूर्ति (Statue)
उछले दौड़े कूदे दिनभर, यह दिखने में बड़ा ही सुंदर, लेकिन नहीं ये भालू बंदर। अपनी धुन में मस्त कलंदर, इसके नाम में जुड़ा है रन, घर हैं इसके सुंदर वन, बताओ कौन ॥
उत्तर – हिरन।
ऐसी क्या चीज है जो सबके पास होती है, किंतु किसी के पास कम तो किसी के पास ज्यादा, जिसके पास ज्यादा होता है उसे बुद्धिमान कहते हैं।
उत्तर – टैलेंट , कला।
ऊँट की बैठक, हिरन सी तेज चाल, वो कौन सा जानवर जिसके पूँछ न बाल।
उत्तर – मेंढक।
मेरा सिर है, पर आँख नहीं, पेट है, पर खाना नहीं। पैर हैं, पर चल नहीं सकता। मैं क्या हूँ?
उत्तर: मूर्ति (Statue)