61.
Paheliyan
सुबह आता शाम को जाता- पहेली
सुबह आता शाम को जाता, दिनभर अपनी चमक बरसाता । समस्त सृष्टि को देता वैभव, इसके बिना नहीं जीवन संभव, बताओ क्या ॥
उत्तर - सूरज।
सुबह आता शाम को जाता, दिनभर अपनी चमक बरसाता । समस्त सृष्टि को देता वैभव, इसके बिना नहीं जीवन संभव, बताओ क्या ॥
उत्तर - सूरज।
एक कमरे में चार भाई रहते हैं, चारों की दिशा अलग होती है। कोई किसी से टकराता नहीं, फिर भी सब एक ही जगह रहते हैं। बताओ वे कौन हैं?
कमरे के चार कोने
पैर नहीं हैं, पर चलती रहती, दोनों हाथों से अपना मुंह पोंछती रहती ।
उत्तर – घड़ी।
न सीखा संगीत कहीं पर, न सीखा कोई गीत, लेकिन इसकी मीठी वाणी में । भरा हुआ संगीत, सुबह सुबह ये करे रियाज, मन को भाती इसकी आवाज, बताओ क्या?
उत्तर – कोयल।
चार टाँग की हूँ एक नारी, छलनी सम मेरे छेद । पीड़ित को आराम मैं देती, बतलाओ भैया यह भेद ।
उत्तर – चारपाई।
रंग बिरंगा बदन है इसका, कुदरत का वरदान मिला, इतनी सुंदरता पाकर भी, दो अक्षर का नाम मिला । ये वन में करता शोर, इसके चर्चे हैं हर ओर, बताओ कौन?
उत्तर – मोर
तीन अक्षर का मेरा नाम, खाने के आता हूँ काम । मध्य कटे हवा हो जाता, अंत कटे तो हल कहलाता ॥
उत्तर – हलवा।
सबके ही घर ये जाये, तीन अक्षर का नाम बताए। शुरु के दो अति हो जाये, अंतिम दो से तिथि बन जाये ॥
उत्तर – अतिथि।
मैं किसी चीज़ को छूता नहीं, फिर भी उसे हिला सकता हूँ। मुझे देखा नहीं जा सकता, लेकिन मेरे आने का एहसास होता है। पेड़ मेरे आते ही झूमने लगते हैं। बताओ मैं कौन हूँ?
हवा।
एक घर में रोज़ एक मेहमान आता है। वह दरवाज़े से नहीं आता, कोई उसे अंदर बुलाता भी नहीं, और शाम होते ही बिना बताए चला जाता है। बताओ वह कौन है?
धूप।
तुम मुझे बोलते हो, मैं तुम्हारी आवाज़ वापस देता हूँ। लेकिन मैं इंसान नहीं हूँ। पहाड़ों में अक्सर मेरे साथ खेल सकते हो। बताओ मैं कौन हूँ?
प्रतिध्वनि (Echo)
एक माता के 2 पुत्र, दोनों महान अलग प्रकृत, भाई भाई से अलग, एक ठंडा दूसरा आग।
उत्तर – चंद्रमा , सूरज।
धन-दौलत से बड़ी है यह, सब चीजों से ऊपर है यह । जो पाए पंडित बन जाए, बिन पाए मूर्ख रह जाए ॥
उत्तर – विद्या।
टोपी है हरी मेरी, लाल है दुशाला । पेट में अजीब लगी, दानों की माला ॥
उत्तर – मिर्च।