106.
Paheliyan
देने से घटती नहीं - पहेली
देने से घटती नहीं, करिए जी भर दान, छीने से छिनती नहीं, देते बढता मान ।
उत्तर –विद्या
देने से घटती नहीं, करिए जी भर दान, छीने से छिनती नहीं, देते बढता मान ।
उत्तर –विद्या
चार खानों का एक मैदान, बच्चे बूढ़े सब का रुझान, विश्व को भारत का यह दान, कहे गोपू भी सीना तान।
उत्तर- शतरंज
एक इंसान का अचरज भेद, हाड़ हाड़ में बांके छेद, मोहि अचंभा आवे ऐसे, जीव बसे है वामे कैसे।
उत्तर - पिंजरा
प्रथम कटे दूल्हा बन जाऊं, चूल्हा जलाने के काम आऊं, उत्सव में मैं पोता जाऊं, पास पशु के पाया जाऊं।
उत्तर – गोबर
सबके हीं घर ये जाए, तीन अक्षर का नाम बताए | शुरु के दो अति हो जाए, अंतिम दो से तिथि बन जाए |
उत्तर – अतिथि
छोटा-सा दाना हूँ, दिखने में चमकीला, मुझको अगर भूनोगे, तो फूल मिलेगा पीला.
उत्तर : मक्का