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जलते-बुझते दीप सरीखे

By Anshul Khandelwal
Riddle
रात्रि बेला के आते ही,  
भरते खूब उड़ान,  
जलते-बुझते दीप सरीखे, 
बारिश के हम मेहमान।

    जुगनू (jugnu)