1.
Paheliyan
दाँत बहुत हैं, लेकिन मैं खाना नहीं खाता।
मेरे दाँत बहुत हैं, लेकिन मैं खाना नहीं खाता। बालों को संवारना मेरा काम है। मैं कौन हूँ?
कंघी
मेरे दाँत बहुत हैं, लेकिन मैं खाना नहीं खाता। बालों को संवारना मेरा काम है। मैं कौन हूँ?
कंघी
मुझे जितना खींचोगे, मैं उतना ही लंबा होता जाऊँगा। लेकिन छोड़ते ही वापस छोटा हो जाऊँगा। बताओ मैं कौन हूँ?
रबर बैंड
ऐसी कौन-सी चीज़ है, जिसे जितना साफ करते जाओ, वह उतनी ही गंदी होती जाती है?
पानी
बिन खाए, बिन पिए, सबके घर में रहता हूँ । ना हँसता हूँ, ना रोता हूँ, घर की रखवाली करता हूँ ॥
उत्तर - ताला।
घर में उछल कूद करता, नीली आंखों से मैं डरता, घर में जो कुछ मिल जाता, कुतर कुतर उसको खा जाता।
उत्तर - चूहा
रंग तीन और चौड़ा सीना, देखो फर -फर करे उड़ान। जय-जयकार बोलते सारे, निश दिन उसको दें सम्मान।
उत्तर - तिरंगा झंडा
दो अक्षर का मेरा नाम, मेरे बिन न चलता काम, रंगहीन हूं स्वादहीन हूं, हरदम आता हूं मैं काम।
उत्तर – पानी
दो भाई हैं एक रंग के, गहरा उनका नाता, एक खो गया मेले में, तो दूजा भी काम न आता।
उत्तर -जूता
रंग बिरंगा बदन है इसका, कुदरत का वरदान मिला, इतनी सुंदरता पाकर भी, दो अक्षर का नाम मिला, ये वन में करता शोर, इसके चर्चे हैं हर ओर।
उत्तर – मोर
ऐसी कौन सी चीज़ है, जिसमें बहुत सारे छेद है, फिर भी पानी को रोक लेता है?
उत्तर- स्पंज
मैं छोटा फकीर, मेरे पेट में लकीर, आता हूं खाने के काम, मेरे बिना जीना नहीं आसान
उत्तर - गेहूं