61.
Paheliyan
मैं रात में दिखाई देता हूँ, लेकिन आसमान में नहीं होता।
मैं रात में दिखाई देता हूँ, लेकिन आसमान में नहीं होता। बिजली जाते ही मेरी जरूरत पड़ती है, बताओ मैं कौन हूँ?
टॉर्च
मैं रात में दिखाई देता हूँ, लेकिन आसमान में नहीं होता। बिजली जाते ही मेरी जरूरत पड़ती है, बताओ मैं कौन हूँ?
टॉर्च
प्रथम कटे पूजा में लीन, मध्य कटे तो कान, अंत कटे तो काली देखा, अक्षर हैं केवल तीन।
उत्तर- कालीन
पानी का मटका पेड़ पर लटका। हवा हो या झटका, उसको नहीं पटका।
उत्तर-नारियल
अपनी देह पर सूत लपेटे, उस बंदे को नाचत देखा, पांव अजूबा है लोहे का, बदन पर रहती पांच-छह रेखा।
उत्तर- लट्टू
एक गुलदस्ता ऐसा देखा, करते नहीं जो भेंट, खाने के काम वो आए, उस में फूल अनेक।
उत्तर – फूलगोभी
मुझमें कोई भी आसानी से फंस सकता है, पर मुझसे निकलना आसान नहीं है , बताओ मैं कौन हूं?
उत्तर – मुसीबत
नाक को पकड़कर, खींचता है कान, कोई नहीं इसे कुछ कहता, बताओ उसका नाम |
उत्तर – चश्मा
दो इंच का मनीराम, दो गज की पूंछ, जहां चले मनीराम वहां चले पूंछ।
उत्तर- सुई धागा
धूप देख मैं आ जाऊँ, छाँव देख शर्मा जाऊँ, जब हवा करे मुझे स्पर्श, मैं उसमे समा जाऊँ, बताओ बताओ कौन हूँ मैं ?
उत्तर - पसीना
सर है, दुम है, मगर पाँव नहीं उसके, पेट है, आँख है, मगर कान नहीं उसके |
उत्तर – साँप
मुझे रात में जागना और दिन में सोना पसंद है। मैं क्या हूँ?
उत्तर: उल्लू
जब मैं पकता हूँ,तो हरा होता हूँ, जब आप मुझे खाते हैं,तो मैं लाल होता हूँ, और जब आप मुझे थूकते हैं,तो मैं काला होता हूँ। मैं क्या हूँ?
उत्तर: तरबूज
एक राजा की गजब है रानी, दुम के रास्ते वो पीती है पानी! बताओ कौन?
उत्तर- दीपक
सरस्वती की सफेद सवारी, मोती जिसको भाते, करके अलग दूध से पानी, बोलो कौन कहलाते?
उत्तर - हंस