यदि आप हिंदी पहेलियों के शौकीन हैं और नई मजेदार पहेलियों की तलाश में हैं, तो यहाँ आपके लिए हैं 20+ नई पहेलियाँ उत्तर सहित। इन पहेलियों को हल करके आप अपनी मनोदशक्ति को मजबूत कर सकते हैं और अपने दोस्तों को भी चुनौती दे सकते हैं। हर पहेली के साथ उत्तर भी दिए गए हैं ताकि आप अपनी जवाबदेही को सुनिश्चित कर सकें। तो आइए, इन मनोरंजक हिंदी पहेलियों का आनंद लें और अपनी बुद्धि को चुनौती दें!
1. बोल नहीं पाती हूँ मैं,
और सुन नहीं पाती |
बिना आँखों के हूँ अंधी,
पर सबको राह दिखाती |
2. तीन अक्षर का मेरा नाम,
बीच कटे तो रिश्ते का नाम |
आखिरी कटे तो सब खाए,
भारत के तीन तरफ दिखाए |
3. शुरू कटे तो कान कहलाऊँ,
बीच कटे तो मन बहलाऊँ |
परिवार की मैं करूँ सुरक्षा
बारिश, आँधी, धूप से रक्षा |
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4. सोने की वह चीज है,
पर बेचे नहीं सुनार |
मोल तो ज्यादा है नहीं,
बहुत है उसका भार |
5. नकल उतारे सुनकर वाणी,
चुप-चुप सुने सभी की कहानी |
नील गगन है इसको भाए,
चलना क्या उड़ना भी आए |
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7. राजा महाराजाओं के ये,
कभी बहुत आया काम |
संदेश इसने पहुचाएँ,
सुबह हो या शाम |
8. आगे ‘प’ है मध्य में भी ‘प’,
अंत में इसके ‘ह’ है |
पेड़ों पर रहता है,
सुर में कुछ कहता है |
9. देखी रात अनोखी वर्षा,
सारा खेत नहाया |
पानी तो पूरा शुद्ध था,
पर पी न कोई पाया |
10. करती नहीं यात्रा दो गज,
फिर भी दिन भर चलती है |
रसवंती है, नाजुक भी,
लेकिन गुफा में रहती है |
11. नहीं सुदर्शन चक्र मगर,
मैं चकरी जैसा चलता |
सिर के ऊपर उल्टा लटका.
फर्श पर नहीं उतरता |
12. पास में उड़ता-उड़ता आए,
क्षण भर देखूँ , फिर छिप जाए |
बिना आग के जलता जाए,
सबके मन को वह लुभाए |
13. छिलके को दूर हटाते जाओ,
बड़े स्वाद से खाते जाओ |
इतना पर अवश्य देखना,
छिलके इसके दूर हीं फेंखना |
14. आँखें दो हो जाए चार,
मेरे बिना कोट बेकार |
घुसा आँखों में मेरा धागा,
दर्जी के घर से मैं भागा |
15. मध्य कटे तो सास बन जाऊँ,
अंत कटे तो सार समझाऊँ |
मैं हूँ पक्षी, रंग सफेद,
बताओ मेरे नाम का भेद |
16. सर्दी की रात मैं नभ से उतरूँ,
लोग कहते हैं मुझे मोती |
सूर्य का प्रकाश देखते हीं,
मैं गायब होती |
17. एक हाथ है लकड़ी की डंडी,
बने हुए हैं इसमें आठ घर |
ज्यों-ज्यों हवा जाए उस भवन में,
त्यों-त्यों निकले हैं मीठे स्वर |
18. उड़ नहीं सकती मैं वायु में,
चल नहीं पाती सड़कों पर |
लेकिन लाखों पर्यटकों को,
पहुँचाती हूँ इधर-उधर |
19. बिन जिसके हो चक्का जाम |
पानी जैसी चीज है वह,
झट से बताओ उसका नाम |
20. मैं एक बीज हूँ,
तीन अक्षर है मेरे |
दो दल वाला अन्न हूँ,
दाल बनाकर खाते हो |
21. करती नहीं यात्रा दो गज़,
फिर भी दिन भर चलती है।
रसवंती है नाज़ुक भी है,
और गुफा में रहती है ?
22. वह कौन है
जिसके पास कभी तो दर्जनों कपड़े होते हैं
और कभी एक भी नहीं होता ?
23. वह क्या है जो ऊपर से फेंक देते हैं,
और अन्दर से पका लेते हैं,
और पकने के बाद अन्दर से फेंक देते है,
ऊपर से खा लेते हैं ?
24. वह कौन सी चीज़ है
जो ज़िन्दा हो तो उसे दफना देते हैं
और मर जाये तो बाहर निकाल देते हैं ?
25. ऐसी कौन सी चीज़ है
जिसे हम देख नहीं सकते
और ना ही चख सकते हैं
मगर खा सकते हैं ?
26. ना ही मैं खाता हूँ
ना ही मैं पीता हूँ
फिर भी सबके घरों की
मैं रखवाली करता हूँ ?
27. जा जोड़े तो जापान, अमीरों के लिए है यह शान,
बनारसी है इसकी पहचान, दावतों में बढ़ती इसकी शान ?
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28. डिब्बा देखा एक निराला ना ढकना ना ताला,
ना पेंदा ना ही कोना है उसमे चाँदी सोना ?
29. बचपन जवानी हरी भरी
बुढ़ापा हुआ लाल
हरी थी तब फूटी थी जवानी
लेकिन बुढ़ापे में मचाया धमाल ?
30. आपके ही घर पे आये तीन अक्षर का नाम बताए,
शुरु के दो अति हो जाये,
अंतिम दो से तिथि बन जाये। बताओ क्या?
31. सुबह, दोपहर, शाम को,
मैं लोगों को भाती। सब्जी के संग मेल है,
आदि कटे तो पाती।
32. रंग-बिरंगी प्यारी-प्यारी दिखने में मैं सबसे न्यारी,
छोटे हल्के पंख फैलाऊँ,
बगिया में मैं रौनक लाऊँ।
33. गोल-गोल हैं जिसकी आंखें,
भाता नहीं उजाला,
दिन में सोता रहता हरदम,
रात विचरने वाला..
34. हरा चोर लाल मकान,
उसमे बैठा काला शैतान,
गर्मी में वह है दिखता,
सर्दी में गायब हो जाता!
बताओ क्या?
35. न मैं दिख सकती हूँ,
न मैं बिक सकती हूँ,
और न ही मैं गिर सकती हूँ.
बताओ मैं कौन हूँ ?
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36. छोटा सा है उसका पेट,
लेता सारा जगत समेट,
चार अक्षर का उसका नाम,
कहानी – कविता भी करता हमको भेंट।
37. अगर प्यास लगे तो पी सकते हैं,
भूख लगे तो खा सकते हैं,
और अगर ठण्ड लगे तो,
उसे जला भी सकते हैं,
बोलो क्या है वो??
38. आँखें होते हुए अंधी हूँ,
पैर होते हुए लंगड़ी हूँ,
मुख होते हुए मौन हूँ,
बताओ बताओ मैं कौन हूँ।
39. ऐसी कौन सी चीज है,
जो पुरुषों में तो बढ़ती है,
लेकिन महिलाओं में नहीं बढ़ती!!
बताओ क्या??
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40. तीन अक्षर से लिखूँ अपना नाम,
उल्टा सीधा सभी एक समान..
41. मेरी पूंछ पर हरियाली,
तन है मगर सफेद,
खाने के हूँ काम आती,
अब बोलो मेरा भेद।
42. तीन रंगों का सुंदर पक्षी,
नील गगन में भरे उड़ान,
सब की आंखों का है तारा,
सब करते इसका सम्मान ।
उत्तर - भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा
43. एक थाल मोतियों भरा,
सबके सिर पर उल्टा धरा,
चारों ओर फिरे वो थाल,
मोती उससे एक न गिरे ।
44. हरी हरी मछली के हरे हरे अंडे।
जल्दी से बूझो पहेली नहीं तो पड़ेंगे डंडे ।
45. ऊपर भी ले जाने वाली,
नीचे भी ले जाने वाली .
जीवन से मृत्यु तक ,
बस इसकी रहे यही कहानी।
46. पूंछ कटे तो सीता.
सिर कटे तो मित्र.
मध्य कटे तो खोपड़ी.
पहेली बड़ी विचित्र।
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47. रंग बिरंगा बदन है इसका,
कुदरत का वरदान मिला,
इतनी सुंदरता पाकर भी,
दो अक्षर का नाम मिला,
ये वन में करता शोर,
इसके चर्चे हैं हर ओर। बताओ कौन?
48. एक फूल ऐसा खिला है,
जिसकी अजब है कहानी।
एक पत्ते के ऊपर दूसरा पत्ता,
दुनिया है इसकी दीवानी।
49. काली है, लेकिन कोयला नहीं।
लंबी है मगर डंडी नहीं,
बांधी जाती है, पर डोर नहीं,
बताओं यह क्या है?
50. आपस में ये मित्र बड़े हैं,
चार पड़े है चार खड़े है।
इच्छा हो तो उस पर बैठो,
या फिर बड़े मजे से लेटो।
51. धक-धक मैं हूँ करती,
फक-फक धुँआ फेंकती,
बच्चे बूढ़े मुझ पर चढ़ते,
निशानों पर मैं दौड़ती।
52. श्याम रंग की है,
आंखों के ऊपर सजी है।
क्या है यह जो भी बोले,
मुंह से उसके जानवर की बोली निकले?
53. जब आप मुझे खरीदते हैं तो मैं काला होता हूं, जब आप मुझे देखते हैं तो लाल और जब आप मुझे बाहर फेंकते हैं तो ग्रे. मैं क्या हूँ?
54. तीन पैर की चम्पा रानी
रोज नहाने जाती।
दाल-भात का स्वाद न जाने,
कच्चा आटा खाती।।
55. कपडे उतरवाये पंखा चलवाये , कहती ठंडा पिने को
अभी – अभी तो नाहा के आया , फिर से कहती नहाने को
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56. मध्य कटे तो बाण बने,
आदि कटे तो गीला,
तीनों अक्षर साथ रहें,
तो पक्षी बने रंगीला।
57. ऐसा कौन सा वस्तु है,
जो है सोने के,
लेकिन सोने से भी सस्ता?
58. लंबा तन और बदन है गोल,
मीठे रहते मेरे बोल,
तन पे मेरे होते छेद,
भाषा का मैं करूँ ना भेद।
अब बताओ जवाब क्या है?
59. धन-दौलत से बड़ी है यह,
सब चीजों से ऊपर है यह
जो पाए पंडित बन जाए,
बिन पाए मूर्ख रह जाए।।
60. लालटेन लेकर उड़ता अंधेरी रात,
जलती बिना तेल बाती के गर्मी, सर्दी, बरसात..
बताओ बताओ कौन हूँ मैं?
61. आँखे दो हो जाए चार,
मेरे बिना कोट बेकार,
घुसा आँखो में मेरा धागा,
दरजी के घर से मैं भागा। ?
62. नहीं चाहिए इंजन मुझको,
नहीं चाहिए खाना,
मुझ पर चढ़कर आसपास का,
कर लो सफर सुहाना। ?
63. गिन नहीं सकता कोई,
है मुझसे ही रूप,
दिमाग को ढके रखता सर्दी,
बरसात व धुप। ?
64. यह हमको देती आराम,
यह ऊँची तो ऊँचा नाम,
बड़े-बड़े लोगों को देखा,
इसके लिये होता संग्राम।
65. बिल्ली की पूँछ हाथ में, बिल्ली रहे इलाहाबाद में।
66. जंगल में मायका, गाँव में ससुराल, गाँव आई दुल्हन उठ चला बवाल।
67. ये धनुष है सबको भाता, मगर लड़ने के काम न आता।
68. बताओ जरा, गोल है पर गेंद नहींं,
पूंछ है पर पशु नहीं।
बच्चे उसकी पूंछ को पकड़कर खलते-हंसते और हैं खिलखिलाते।
69.ऊंट की बैठक
हिरण सी तेज चाल
वो कौन सा जानवर
जिसके पूंछ न बाल
70. एक पैर है काली धोती
जाड़े में वह हरदम सोती
गर्मी में है छाया देती
सावन में वह हरदम रोती।
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