16.
Paheliyan
हरी-हरी कोठी भारी - पहेली
हरी-हरी कोठी भारी, उजली-उजली धरती, लाल-लाल बिस्तर पर, काली मछली सोती।
उत्तर –तरबूज।
हरी-हरी कोठी भारी, उजली-उजली धरती, लाल-लाल बिस्तर पर, काली मछली सोती।
उत्तर –तरबूज।
वह क्या चीज़ है, जो जब आप इसे खिलाते हैं, तो बढ़ती है, लेकिन जब आप इसे पानी देते हैं, तो मर जाती है?
उत्तर: आग
मेरा दो अक्षर में नाम आता, पहाड़ी वृक्षों में गिना जाता, मैं कंटीला वृक्ष कहलाता, पहाड़ो की शोभा बढ़ाता।
उत्तर –खैर।
अश्व की सवारी, भाला ले भारी, घास की रोटी खाई, जारी रखी लड़ाई।
उत्तर –राणाप्रताप।
वह क्या है, चीज़ नीचे गिरती है, लेकिन कभी ऊपर नहीं जाती?
उत्तर: बारिश
पेड़ पर उल्टा लटकूँ, मैं अंधेरे का राजा, दिन भर सोता रहता हूँ मैं, रात को बजाऊँ बाजा.
उत्तर : चमकादड़
पेड़ पर उल्टा लटकूँ, मैं अंधेरे का राजा, दिन भर सोता रहता हूँ मैं, रात को बजाऊँ बाजा.
उत्तर : चमकादड़
न कभी आता, न कभी जाता, इसके भरोसे हर कोई जीता, जिसके लिए सब करते इंतज़ार, आते ही बदल जाता उसका नाम हर बार। बताओ वह क्या है?
कल
"गोल-गोल हूँ लाल-लाल, पेट में मेरे दानेदार जाल, खट्टा-मीठा स्वाद है मेरा, सेहत का मैं रखूँ ख्याल।"
अनार
"गोल-गोल हूँ, पेट में धागा, हर हलवाई की दुकान पर भागा। मुँह में जाते ही रस घुल जाए, जल्दी से बताओ नाम क्या कहलाए?"
जलेबी
अन्त कटे तो मानव हूं, प्रथम कटे ‘नम’ हो जाऊं, मध्य काट तो ‘जम’ जाऊं, बोलो-मैं क्या कहलाऊं।
उत्तर –जनम।
कठोर भी हूं और महंगा भी, उलटा कर दो सफर करूं, करवा दूं सबमें झगड़ा, मुंह में रख लो प्राण हरूं।
उत्तर –हीरा।
‘पवित्र प्यार का चिह्न हूँ मैं; गैरों को बना लें अपना, उल्टा कर दो सब्जी हूं, खा सकते हो मुझे कच्चा।
उत्तर –राखी।
वैसे मैं हूं बेचारा, पर उलटा कर दो तो पालें, दीन दुखी हूं, दो अक्षर का, बतला दो तो जानूं, इस पहेली का उत्तर–इसी पहेली में ही हैं।
उत्तर - दीन।