46.
Paheliyan
हरे हरे से है दिखे पक्के हो या कच्चे, भीतर से यह लाल मलाई जैसे ठंडे मीठे लच्छे।
उत्तर –तरबूज।
अपनों के ही घर ये जाये, तीन अक्षर का नाम बताये। शुरू के दो अति हो जाये, अंतिम दो से तिथि बताये।
उत्तर: अतिथि
जितना निकालो, उतना ही बढ़ता हूँ, सब मुझसे डरते हैं, पर मैं कुछ नहीं करता। मैं क्या हूँ?
उत्तर: अंधेरा
लाल हूँ, खाती हूँ मैं सूखी घास। पानी पीकर मर जाऊँ, जल जाए जो आए मेरे पास।
उत्तर – आग।
पूंछ कटे तो सीता, सिर कटे तो मित्र, मध्य कटे तो खोपड़ी, पहेली बड़ी विचित्र ॥
उत्तर – सियार।
एक पेड़ में एक ही पत्ती, वो भी रंग बिरंग, करते सभी नमन हैं उसको, मन मे भरे उमंग?
उत्तर – झंडा।
डिब्बा देखा एक निराला, ना ढकना न ताला, न पेंदा नाही कोना, बंद है उसमें चांदी और सोना।
उत्तर – अंडा।
एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार, टकराए जब दीवारों से, ख़त्म हो जाये उनका संसार ॥
उत्तर – माचिस।
राजा महाराजाओं के ये, कभी बहुत आया काम| संदेश इसने पहुचाएँ, सुबह हो या शाम|
उत्तर – कबूतर।
लंबा तन और बदन है गोल, मीठे रहते मेरे बोल, तन पे मेरे होते छेद, भाषा का मैं न करूँ भेद ॥
उत्तर – बांसुरी।
एक साथ आए दो भाई, बिन उनके दूर शहनाई । पीटो तब वह देते संगत, फिर आए महफ़िल में रंगत ॥
उत्तर – तबला।