76.
Paheliyan
ना किसी से प्रेम ना किसी से बैर-पहेली
ना किसी से प्रेम ना किसी से बैर, फिर भी लोग लेते मेरी रोज खैर, सबके गानों की रौनक है बढ़ती, फिर भी मुझ पर थप्पड़ पड़ती।
उत्तर – ढोलक।
ना किसी से प्रेम ना किसी से बैर, फिर भी लोग लेते मेरी रोज खैर, सबके गानों की रौनक है बढ़ती, फिर भी मुझ पर थप्पड़ पड़ती।
उत्तर – ढोलक।
मेरा सिर है, पर आँख नहीं, पेट है, पर खाना नहीं। पैर हैं, पर चल नहीं सकता। मैं क्या हूँ?
उत्तर: मूर्ति (Statue)
ऐसी क्या चीज है, जिसके पास चेहरा है दो हाथ है मगर टांगे नहीं है?
उत्तर – घडी।
चार टाँग की हूँ एक नारी, छलनी सम मेरे छेद । पीड़ित को आराम मैं देती, बतलाओ भैया यह भेद ।
उत्तर – चारपाई।
दो सुंदर लड़के, दोनों एक रंग के, एक बिछड़ जाये तो दूसरा काम न आये ॥
उत्तर – जूते।
एक थाल मोतियों से भरा, सबके सिर पर उल्टा धरा । चारों ओर फिरे वो थाल; मोती उससे एक ना गिरे, बताओ क्या ॥
उत्तर – आसमान।
सबके ही घर ये जाये, तीन अक्षर का नाम बताए। शुरु के दो अति हो जाये, अंतिम दो से तिथि बन जाये ॥
उत्तर – अतिथि।
बिन जिसके हो चक्का जाम। पानी जैसी चीज है वह, झट से बताओ उसका नाम।
उत्तर – पेट्रोल।
ऐसी कौन सी चीज है, जिसे जितना खींचो उतनी ही कम होती जाती है ?
उत्तर – सिगरेट या बीड़ी।
काली हूं पर कोयल नहीं, लंबी हूं पर डंडी नहीं, डोर नहीं पर बांधी जाती, मैया मेरा नाम बताती।
उत्तर – चोटी।
टोपी है हरी मेरी, लाल है दुशाला । पेट में अजीब लगी, दानों की माला ॥
उत्तर – मिर्च।
ऐसे वाहन का नाम बताइए, जिसका नाम आगे पीछे करने पर भी अर्थ में कोई भिन्नता नहीं होती?
उत्तर – जहाज।