106.
Paheliyan
धरती पे ना रखता पैर-पहेली
दुनियाँ भर की करता सैर, धरती पे ना रखता पैर । दिन में सोता रात में जागता, रात अंधेरी मेरी बगैर, जल्दी बताओ मैं कौन?
उत्तर – चाँद।
दुनियाँ भर की करता सैर, धरती पे ना रखता पैर । दिन में सोता रात में जागता, रात अंधेरी मेरी बगैर, जल्दी बताओ मैं कौन?
उत्तर – चाँद।
प्रथम कटे तो दर हो जाऊं, अंत कटे तो बंद हो जाऊं, केला मिले तो खाता जाऊं, बताओ मैं हूँ कौन ॥
उत्तर – बंदर।
दो अंगुल की है सड़क, उस पर रेल चले बेधड़क, लोगों के हैं काम आती, समय पड़े तो खाक बनाती।
उत्तर – माचिस।
एक जलते हुए घर के पास दो आदमी आग बुझा रहे थे, वहां से गुजरने वाले एक व्यक्ति ने उन दोनों को, पीछे घसीट दिया लेकिन फिर भी उसे जेल हो गई, कारण बताओ।
उत्तर – क्योंकि वह दोनों आग बुझाने वाले कर्मचारी थे तीसरा व्यक्ति जो सड़क से जा रहा था उसने दोनों को पीछे खींचा और आग बुझाने में बाधा पँहुचाई।
आगे ‘प‘ है मध्य में भी ‘प‘, अंत में इसके ‘ह‘ है, कटी पतंग नहीं ये भैया । न बिल्ली चूहा है; वन में पेड़ों पर रहता है, सुर में रहकर कुछ कहता है, बताओ क्या ॥
उत्तर – पपीहा।
एक चीज़ जो सूखी रहे तो डूब जाती है, और गीली हो तो तैरती है। वो क्या है?
उत्तर: नाव (Boat)
मैं खुद कभी नहीं चलता, लेकिन मेरे बिना गाड़ी नहीं चलती। मैं सड़क पर रहता हूँ, फिर भी मेरे पैर नहीं हैं। बताओ मैं कौन हूँ?
पहिया