46.
Paheliyan
सबसे ऊंचा उड़े गगन में-नई पहेली
दूर-दूर तक नजर डालकर, खाने का पता लगाए सबसे ऊंचा उड़े गगन में, मरा पशु ही खाए।
उत्तर –गिद्ध
दूर-दूर तक नजर डालकर, खाने का पता लगाए सबसे ऊंचा उड़े गगन में, मरा पशु ही खाए।
उत्तर –गिद्ध
पानी का है मेरा चोला, हूं सफेद पानी का गोला, जमा यदि मुझे रख पाओगे, बुला बुला कर थक जाओगे।
उत्तर –बुलबुला
वो कौन है, जो सुबह से लेकर शाम तक सूरज की तरफ देखता रहता है?
उत्तर –सूरजमुखी
आलू में हूं भालू में हूं, आपके तालू में भी, मई-जून के आते ही, हो जाती हूं चालू में।
उत्तर – लू
एक नार कुएं में रहें, वाका नीर खेत में बहे। जो कोई वाके नीर को चाखे, फिर जीवन की आस न राखे।
उत्तर – तलवार
लंबा मैं जवान हूं, छोटा मैं बूढ़ा हूं, जबकि जीवन के साथ मैं चमकता हूं हवा मेरे दुश्मन है।
उत्तर – मोमबत्ती
भीतर चिलमन बाहर चिलमन, बीच कलेजा धड़के। अमीर खुसरो यूं कहे, वह दो दो उंगल सरके।
उत्तर –कैंची
बिना पूंछ का चौपाया, खाती के घर से आया, हिले डुले ना कुछ खाए, नहीं भार से घबराए।
उत्तर –खाट
तीन कोण है तीन भुजाएं, भरा मसाला पेट, अभी गरम है फिर खा लेना, कर लो थोड़ा वेट।
उत्तर –समोसा
सिल बट्टे पर कभी पीसते, कभी कुचलते मूसल भारी, रक्त से कोलेस्ट्रोल हटाती, हृदय रोग में हूं गुणकारी।
उत्तर – लहसुन
तीन अक्षर से मैं बनूं, पर्यावरण की रक्षा करूं, प्रथम कटे तो गल जाए, अंत कटे तो जंग हो जाए।
उत्तर – जंगल
मन में आता और जगाता, वापस नया विश्वास, राह दिखाता लक्ष्य दिखाता, देती सच्ची आस।
उत्तर –साहस
तीन अक्षर मेरा नाम, सुनते ही मिलता आराम, राजा रंक सब चाहे मुझको, सात रसों की मुझमे खान।
उत्तर –संगीत