16.
Paheliyan
न कभी होता है मरण - नई पहेली
न कभी होता है जन्म, न कभी होता है मरण, सब जीवों में आती जाती, मैं अजर अमर कहलाती।
उत्तर –आत्मा
न कभी होता है जन्म, न कभी होता है मरण, सब जीवों में आती जाती, मैं अजर अमर कहलाती।
उत्तर –आत्मा
तीन अक्षर का नाम छोटा सा, दिखने में बिल्कुल पतला सा, जो भी मेरे सामने आता, सच्चा रूप दिखाता उसका।
उत्तर –आईना
ऐसी कौन सी चीज है, जो सारे बच्चे खाते हैं लेकिन अच्छी किसी को नहीं लगती है?
उत्तर –डांट
द्वार पर दीवार पर, चिपकी यो ही पड़ी है, काराज कबहूँ नहीं करत, खाने पर आंखें गड़ी है।
उत्तर –छिपकली
अलग अलग पर एक ही नाम, रूप एक सा एक ही काम, बोल ना जाने सुनते संग, इन दोनों के बीच सुरंग।
उत्तर – कान
दौड़ दौड़ कर दूर समंदर से आती है, और किनारे पर आकर के खो जाती है।
उत्तर – लहरें
हमारे पूरे शरीर में रहता, लाल लाल रंग उसका होता, कभी दान हम उसको करते, दो अक्षर से लिखा है जाता।
उत्तर –खून
ऊपर भी ले जाने वाली, नीचे भी ले जाने वाली जीवन से मृत्यु तक, बस इसकी रहे यही कहानी।
उत्तर – सांसे
करता नकल आदमी की, मैं शाखा मृग कहलाता, पूछो अदरक का स्वाद अगर, तो बता नहीं मैं पाता।
उत्तर –बंदर
नाम उसका उल्टा सीधा एक समान, न्याय दिलाना उसका काम, सही करे या गलत निर्णय, पर सब करते उसका सम्मान।
उत्तर – जज
पहले थी मैं भोली भाली, सब सहती थी मार, अब पहनी मैंने लाल चुनरिया, अब ना सहूंगी मार।
उत्तर – घड़ा
देहरादून निकट है नीचे, अधिक नहीं है दूरी, पर्वत की रानी कहलाती, आदि कटे पर सूरी।
उत्तर – मसूरी
छोटा सा है उसका पेट, लेता सारा जगत समेत, चार अक्षर का उसका नाम, कहानी कविता भी करता हमको भेंट।
उत्तर –अखबार
दुबली पतली मेरी काया, एक आंख की देखो माया, धागे ने जब साथ दिया तो, दो बिछड़ो को खूब मिलाया।
उत्तर – सुईधागा