बोलने और मिठास घोलने वाली भाषा
"दुनिया में ऐसी कौन सी भाषा है, जिसे लोग बोलते भी हैं और खाने में मिठास घोलने के काम भी लाते हैं?"
चीनी (Chinese भाषा / शक्कर)
"दुनिया में ऐसी कौन सी भाषा है, जिसे लोग बोलते भी हैं और खाने में मिठास घोलने के काम भी लाते हैं?"
चीनी (Chinese भाषा / शक्कर)
एक ऐसी चीज़ है, जिसके अंदर पूरी दुनिया समाई, खोलो तो ज्ञान मिलता है, बंद करो तो चुप हो जाती है। बताओ वह क्या है?
किताब
आसमान से बूंदें आएँ, मैं सिर पर छत बन जाऊँ। धूप हो या बारिश की मार, साथ निभाऊँ हर बार। बताओ मैं कौन हूँ?
छाता
तुम बोलो तो मैं भी बोलूँ, तुम चुप हो तो मैं भी चुप। मेरे पास न मुँह है, न जीभ, फिर भी तुम्हारी बात दोहराऊँ।
गूंज
"वह क्या है जिसे आगे से भगवान ने बनाया है और पीछे से इंसान ने बनाया है?"
बैलगाड़ी
"एक ऐसी रानी है जो बिना पैरों के पूरे शहर में घूमती है, और अपनी एक छोटी सी चुभन से सबको रोना सिखा देती है।"
सुई
कटे कान तो झटपट लिखूं,बिना कटे सबको काटूं।मुझको सीधा करो अगर,तो राजा के संग मैं बैठूं।बताओ क्या हूँ मैं?
कलम / पेन
प्रथम कटे पूजा में लीन, मध्य कटे तो कान, अंत कटे तो काली देखा, अक्षर हैं केवल तीन।
उत्तर- कालीन
पानी का मटका पेड़ पर लटका। हवा हो या झटका, उसको नहीं पटका।
उत्तर-नारियल
अपनी देह पर सूत लपेटे, उस बंदे को नाचत देखा, पांव अजूबा है लोहे का, बदन पर रहती पांच-छह रेखा।
उत्तर- लट्टू
मुझमें कोई भी आसानी से फंस सकता है, पर मुझसे निकलना आसान नहीं है , बताओ मैं कौन हूं?
उत्तर – मुसीबत
नाक को पकड़कर, खींचता है कान, कोई नहीं इसे कुछ कहता, बताओ उसका नाम |
उत्तर – चश्मा
दो इंच का मनीराम, दो गज की पूंछ, जहां चले मनीराम वहां चले पूंछ।
उत्तर- सुई धागा
धूप देख मैं आ जाऊँ, छाँव देख शर्मा जाऊँ, जब हवा करे मुझे स्पर्श, मैं उसमे समा जाऊँ, बताओ बताओ कौन हूँ मैं ?
उत्तर - पसीना
सर है, दुम है, मगर पाँव नहीं उसके, पेट है, आँख है, मगर कान नहीं उसके |
उत्तर – साँप