ऐसी रानी, जो बिना पैरों के पूरे शहर में घूमती है पहेली!
"एक ऐसी रानी है जो बिना पैरों के पूरे शहर में घूमती है, और अपनी एक छोटी सी चुभन से सबको रोना सिखा देती है।"
सुई
"एक ऐसी रानी है जो बिना पैरों के पूरे शहर में घूमती है, और अपनी एक छोटी सी चुभन से सबको रोना सिखा देती है।"
सुई
कटे कान तो झटपट लिखूं,बिना कटे सबको काटूं।मुझको सीधा करो अगर,तो राजा के संग मैं बैठूं।बताओ क्या हूँ मैं?
कलम / पेन
दिन के उजाले में मैं खो जाता हूँ, रात होते ही चमक जाता हूँ। मेरे पास अपनी रोशनी नहीं, फिर भी आसमान में सुंदर लगता हूँ। मैं कौन हूँ?
चाँद
मेरे पास पंख नहीं, फिर भी मैं उड़ता हूँ, मेरे पास आँखें नहीं, फिर भी रोता हूँ। बताओ मैं कौन हूँ?
बादल
मैं खुद चुप रहता हूँ, पर तुम्हारी आवाज़ दूर तक पहुँचा देता हूँ। मुझे हाथ में पकड़कर बात करते हैं, बताओ मैं कौन हूँ?
माइक्रोफोन
मैं खुद नहीं चलता, लेकिन मेरे पहिए घूमते रहते हैं। मुझे धक्का दो तो आगे बढ़ता हूँ, और सामान उठाने के काम आता हूँ। बताओ मैं कौन हूँ?
ठेला
तीन अक्षरों का मेरा नाम, प्रथम कटे तो चार, कैसे हो तुम मैं जानू, बोलो तुम सोच विचार।
उत्तर - अचार
पानी का मटका पेड़ पर लटका। हवा हो या झटका, उसको नहीं पटका।
उत्तर-नारियल
अपनी देह पर सूत लपेटे, उस बंदे को नाचत देखा, पांव अजूबा है लोहे का, बदन पर रहती पांच-छह रेखा।
उत्तर- लट्टू
एक गुलदस्ता ऐसा देखा, करते नहीं जो भेंट, खाने के काम वो आए, उस में फूल अनेक।
उत्तर – फूलगोभी
पहले खाता था कोयला, फिर पीता था डीजल, अब सेवन करता बिजली का, जाने कौन होगा कल।
उत्तर - रेल इजंन
बीन लेकर चलता हूं, पर नहीं मैं सपेरा, दूर दूर की चीज दिखाऊं, नाम बताओ मेरा?
उत्तर – दूरबीन
मुझमें कोई भी आसानी से फंस सकता है, पर मुझसे निकलना आसान नहीं है , बताओ मैं कौन हूं?
उत्तर – मुसीबत
नाक को पकड़कर, खींचता है कान, कोई नहीं इसे कुछ कहता, बताओ उसका नाम |
उत्तर – चश्मा
लंबा तन और बदन है गोल, मीठे रहते मेरे बोल | तन पे मेरे होते छेद, भाषा का मैं न करूँ भेद |
उत्तर – बाँसुरी